रविवार, 2 जुलाई 2017






      राधा
राधा नाम है प्रेम का,
जो हर औरत के
 हृदय में बसती है ।
राधा नाम है शायद,
पवित्रता और त्याग का,
मधुर भावों का ,
सतरंगी सपनों का,
मन की विह्वलता का,
सृष्टि के रूप का ,
आँखों के अश्रु का ,
सृजन की वेदिका पर,
प्रेम की आहुति का ।
                 इंदु किरण







: मैं शरीर नहीं, शरीर में स्थित हृदय हूँ,
मेरी खूबसूरती आँखों से नहीं दिखती।
मैं तन को छूते ही बिखर जाता हूँ,
मैं तो प्रेम हूँ जो अंतर्मन में बसता हूँ।
तन तो सिर्फ़ माध्यम है ,मुझे महसूस करने का ।
आँखों के रास्ते आत्मा में उतरता हूँ,
कोई रूप ,रंग और आकार नहीं है मेरा,
पर हो जाता है सारा संसार रंगीन
जब हृदय तल को छूता हूँ ।
गूँजने लगती है अंतर्ध्वनि,
बजने लगता है मधुर संगीत चारो ओर ।
मन हो जाता है निर्मल और पवित्र
जैसे धुल गया हो गंगा जल से ।
मन की मैल समा जाती है आँसुओं में ,
बहने लगती है सुहावनी बयार हर तरफ ।
महकने लगता फूल हरसिंगार का रातों में।
साँसों में बस जाती है एक ऐसी महक ,
जो सुगंधमय कर देता है सारा वातावरण।
आँखों में आ जाती है कुछ ऐसी चमक
सृष्टि की हर चीज़ पर जाती है नज़र ।
अनुभूति को मिल जाती है अभिव्यक्ति ,
मिल जाता है काल्पनिक संसार ,
सकारात्मक विचार,
प्रेममय मन ,
पा लेता है वह सबकुछ
तृप्ति ,शांति, चंचलता और मोक्ष
भा जाता है प्रिय का हर रूप
यही है सच्चे प्रेम का स्वरूप ।।