ग़ज़ल
आज फिर से बिखर
गया कोई,
करके वादे मुकर
गया कोई।
इश्क़ की राह है
कठिन यारों,
जी गया कोई मर गया कोई।
अब ये मंज़र मुझे
नहीं भाते,
मुझ पे जादू सा
कर गया कोई।
सारी दुनिया उदास
दिखती है,
अश्क़ आँखों में
भर गया कोई।
ऐ 'किरण'जी लो तुम तो जी
भर के,
हाथ माथे पे धर
गया कोई।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें