शनिवार, 4 मई 2013

ghazal


     ग़ज़ल
    आज फिर से बिखर गया कोई,

करके वादे मुकर गया कोई।

 

इश्क़ की राह है कठिन यारों,

 जी गया कोई मर गया कोई।

 

अब ये मंज़र मुझे नहीं भाते,

मुझ पे जादू सा कर गया कोई।

 

सारी दुनिया उदास दिखती है,

अश्क़ आँखों में भर गया कोई।

 

'किरण'जी लो तुम तो जी भर के,

हाथ माथे पे धर गया कोई।

 

              

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