ग़ज़ल
एक दिन इक पल में ही अच्छा बुरा हो जाएगा,
आप जो सँभले नहीं तो हादसा हो जाएगा।
आज सबकी ज़िंदगी में है न जाने क्यों घुटन,
सोच जो बदली न हमने क्या से क्या हो जाएगा।
दौर ये आया है ऐसा ख़ुद ही ख़ुद को तोल ले
वरना इक दिन इस जहां से लापता हो जाएगा।
दिल के रिश्तों को रखो दिल से सदा ही जोड़ के,
रह गई कोई कमी तो फ़ासला हो जाएगा।
रुक गया है जो सफ़र हिम्मत करो आगे बढ़ो,
देखना इक दिन बड़ा ये हौसला हो जाएगा।
आँधियों की ज़द से है जो घर बहुत बिखरा हुआ
तिनका-तिनका फिर समेटो घर खड़ा हो जाएगा।
है 'किरण'जो साथ तो फिर
तीरगी से डर है क्यों,
बढ़ते जाओ फिर तेरा सब कुछ भला हो जाएगा।
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