ग़ज़ल
गीत लहरों ने समुंदर को सुनाया होगा,
चैन कुछ देर को उसको भी तो आया होगा।
उसकी आँखों में समुंदर ही उतर आया है,
याद शिद्दत से उसे कोई तो आया होगा।
उम्र भर साथ भला कोई कहाँ देता है,
साथ चलता है जो अपना ही वो साया होगा।
उसके लहज़े में ये दरिया -सी रवानी क्यों है,
रात फिर ख़्वाब में उसके कोई आया होगा।
आज फिर हो गयीं रंगीन फ़ज़ाएँ अब तो,
रंग उसने ही हवाओं में उड़ाया होगा।
ख़ुद को दुनिया की निगाहों से बचाने के लिए,
उसने चेहरे को कई बार छुपाया होगा।
ऐ 'किरण' आज ये बेचैन
परिंदे क्यों हैं,
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