ग़ज़ल
साँसों में है वतन तू मेरी धड़कनों में है,
सांसों में है वतन तू मेरी धड़कनों में है,
एहसास में बसा तू मेरी चाहतों में है।
आज़ाद तू रहे सदा,खुशहाल तू रहे,
हर रोज़ ही यही दुआ अब आदतों में है।
विजयी है तू सदा से ही विजयी रहेगा तू,
अब खौफ़ तेरा भी सदा ही दुश्मनों में है।
महफूज़ हम रखेंगे हरिक हाल में तुझे,
तुझको सँभालने का दम इन बाजुओं में है।
तेरी ही शान में खड़े हैं ये जवान सब
दुश्मन तो आजकल सदा ही मुश्किलों में है।
झुकने न पाये ध्वज कभी बस ये इरादा है
ऊँची उड़ान अब तो मेरे हौसलों में है।
इंदु मिश्रा'किरण'
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